ऋषि शुक्ला, चन्द्रशेखर आजाद नगर
6 दिसम्बर वर्ष 1992 को पूरे भारत वर्ष में कार सेवको के द्वारा श्रीराम जन्मभूमि पर स्थित बाबरी ढांचे को गिराने वाले रामभक्तो ने अपने प्राणों की चिंता न करते हुए श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला को विराजमान करने का संकल्प लिया था। उस आंदोलन में झाबुआ जिले से दौलत भावसार एवं शैलेश दुबे एवं चन्द्रशेखर आजाद नगर सेे कार सेवक मदनसिंह डावर जो कि आदिवासी समाज से है, एवं दिवंगत रमेश चंद्र पुरोहित ब्राम्हण , दिवंगत मिथुन ठाकुर, दिवंगत दिनेश पंचाल, दिवंगत दिलीप चतर्भुज दिवंगत पप्पू पहाड़सिंह हरिजन समाज से महेंद्र वर्मा इन राम भक्तो के दल ने अयोध्या में चल रहे बाबरी विध्वंश आंदोलन में भाग लेकर तत्कालीन झाबुआ जिले का नाम किया था । जब अयोध्या से इन रामभक्तो की सकुशल वापसी हुई थी तब सर्व हिन्दू समाज ने एक दूसरे से गले मिलकर घर घर उनका सम्मान किया गया था ।
विगत 21 जनवरी को सर्व हिन्दू समाज द्वारा नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई थी उस शोभायात्रा में कार सेवको को सम्मान नही दिया गया । सर्व हिन्दू समाज के द्वारा निकाली गई शोभायात्रा में कार सेवको की उपेक्षा को लेकर चन्द्रशेखर आजाद नगर के कार सेवक मदनसिंह डावर ने मीडिया को बताया कि अयोध्या में विगत 1992 को हुई बाबरी विध्वंस की घटना को लेकर उस आंदोलन में चन्द्रशेखर आजाद नगर के कार सेवक अयोध्या पहुचे थे वहां 6 दिसम्बर को बाबरी विध्वंस में उनकी भूमिका का वर्णन करते हुए उन्होने बताया कि अयोध्या से कार सेवक मदनसिंह डावर बाबरी ढाँचा ढहाने के बाद उसके अंदर से मन्दिर की शिला (ईंट) लेकर चन्द्रशेखर आजाद नगर आये थे उस समय नगर में उनका एतिहासिक सम्मान किया गया था।
मदनसिंह डावर ने बताया कि अयोध्या में रामजी की प्रतिष्ठा के पूर्व चन्द्रशेखर आजाद नगर में सरस्वती शिशु मंदिर पर तैयारियों को लेकर सर्व हिन्दू समाज की ओर से प्रान्त प्रचारक भूपेंद्र जी कसेरा के नेतृत्व में बैठक में कार सेवको को भी आमंत्रित किया गया था उस बैठक में मै स्वयं ओर महेंद्र वर्मा जो नगर के मात्र दो कार सेवक जिवीत बचे है को आमंत्रित किया गया था । शेष सभी कारसेवक दिवंगत हो चुके है । बैठक में समाजजनों ने हिन्दू समाज द्वारा कार सेवको के सम्मान की बात की गई थी। लेकिन 21 जनवरी को शोभायात्रा में मैने उन लोगों को घोड़े पर बैठा देखा जिनका अयोध्या बाबरी आंदोलन से कोई सम्बन्ध नही है और नही वे कभी बाबरी विध्वंस आंदोलन में शामिल हुए थे ।
श्रीराम जी प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मेरा मन प्रफुल्लित था इसलिए निकाली जा रही शोभा यात्रा में एक से डेढ़ किलो मीटर पैदल चला जिसके पश्चात् कुुछ समाजजनों ने मुझे कहा मदन दादा आप बहुत अपमान सहन कर चुके हो अब आप घर चले जाओ इसके बाद में घर लौट आया । इस पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रान्त प्रचारक भूपेंद्र जी कसेरा ने कार सेवको की कोई खबर नही ली और कार सेवको के सम्मान के बारे में नगर जनों से इस सम्बंध में कोई पूछताछ भी नही की गई।


