कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया की बड़ी उपलब्धि: पेटलावद सिविल अस्पताल को मिली डायलिसिस मशीन, इंदौर-रतलाम की दौड़ से मिलेगी मुक्ति

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झाबुआ। पेटलावद क्षेत्र के किडनी रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। लंबे समय से चली आ रही डायलिसिस मशीन की किल्लत अब खत्म होने वाली है। क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश की कैबिनेट मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया के विशेष प्रयासों से पेटलावद सिविल अस्पताल को अत्याधुनिक हीमोडायलिसिस मशीन उपलब्ध हो गई है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की नींव पिछले दिनों तब रखी गई जब मंत्री निर्मला भूरिया ने भोपाल में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात की थी। उन्होंने उपमुख्यमंत्री को बताया कि पेटलावद क्षेत्र के मरीजों को डायलिसिस के लिए रतलाम और इंदौर जैसे शहरों तक लंबा सफर तय करना पड़ता है, जो न केवल कष्टदायी है बल्कि आर्थिक रूप से भी भारी पड़ता है। मंत्री के अनुरोध पर उपमुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल मशीन की मंजूरी दी, जिसके बाद 13 लाख 96 हजार 290 रुपए की लागत वाली मशीन अब अस्पताल पहुँच चुकी है।


मरीजों का दर्द और सफर की मजबूरी-

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पेटलावद क्षेत्र के लगभग 36 मरीज ऐसे हैं जिन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस के लिए इंदौर या रतलाम जाना पड़ता है। इन मरीजों के लिए यह सफर किसी सजा से कम नहीं था। खराब स्वास्थ्य के बीच घंटों का सफर तय करना, बस या निजी वाहनों का किराया और शहरों में रुकने का खर्च गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रहा था। कई बार समय पर वाहन न मिलने या ट्रैफिक की वजह से डायलिसिस में देरी होने पर मरीजों की जान पर बन आती थी।


स्थानीय स्तर पर सुविधा से बदल जाएगी तस्वीर-


सिविल अस्पताल पेटलावद में डायलिसिस मशीन लगने से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा बदलाव आएगा। अब मरीजों को अपने ही शहर में इलाज मिलेगा, जिससे उनका यात्रा का समय और पैसा दोनों बचेगा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी फेलियर की स्थिति में समय पर डायलिसिस होना अत्यंत आवश्यक है। घर के पास सुविधा होने से मरीज नियमित रूप से उपचार ले सकेंगे, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा और संक्रमण का खतरा भी कम होगा।


शीघ्र सेवा शुरू करने के निर्देश-


मंत्री निर्मला भूरिया ने मशीन उपलब्ध होने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इसकी स्थापना और संचालन की प्रक्रिया तत्काल युद्धस्तर पर पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि संसाधन उपलब्ध होने के बाद अब मरीजों को एक दिन भी और इंतजार नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग अब मशीन को इंस्टॉल करने और संबंधित तकनीकी स्टाफ की तैनाती में जुट गया है, ताकि जल्द से जल्द पहली डायलिसिस प्रक्रिया अस्पताल में ही संपन्न हो सके।




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