मालवा लाइव पेटलावद। निर्मल व्यास
करवड़ निवासी आगम के आने से पुरे परिवार मे खुशियों महकने लगी थी परिवार में आगम के साथ बेटी ने भी जन्म लिया था तो मानो परिवार की खुशियां सातवें आसमान को छू रहे थी आगम की बाल हट एवं चेहरे पर कृष्ण जैसी मुस्कान से हर कोई अभिभूत था परंतु परिवार उस समय सदमें मैं आ गया जब उन्हें पता चला कि आगम को एक गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया करीब 2 वर्ष से अधिक समय तक परिवार जनों ने उसके इलाज के लिए पूरी ताकत झोंक दी हर बड़े शहर में जाकर उन्होंने उसका इलाज करवा कर उसे शीघ्र ही स्वस्थ होने के साथ ही हर देव स्थान पर भी उसके स्वस्थ होने की कामना की परंतु कुदरत को कुछ और ही मंजूर था कि अचानक शनिवार शाम उसके दुखद निधन की खबर ने परिवार के साथ साथ ग्राम वासियों को सकते में डाल दिया हंसता खेलता और चहकता आगम पूरे परिवार को छोड़ एक ऐसा गम दे गया जो पूरे परिवार के लिए लंबे समय तक भुला पाना मुश्किल होगा एकाएक आगम का यू चले जाना मानो पूरे परिवार के लिए एक बड़ा वज्रपात हो गया परंतु विपरीत परिस्थितियों के बाद भी पिता धर्मेंद्र मांडोत ने स्वयं पर धैर्य और संयम रखते हुए एक ऐसा साहसिक कदम उठाया जिसकी आज पूरे ग्राम के साथ-साथ समाज में भी उनके इस ऐतिहासिक कदम की प्रशंसा की जा रही है महज 6 वर्ष के आगम की मृत्यु के बाद पिता उसकी आंखें दान करने का मन बनाया और तेरापंथ युवक परिषद इंदौर को इसकी सूचना देकर शंकर आय की टीम से इस पुनीत कार्य को संपन्न करवाया इस संबंध में गांधी का कहना है आज हमें उसे खोने का गम तो जरूर है परंतु उसकी कृष्ण जैसी लीला नटखट चंचल और उसकी कोमल आंखों से परिवार की सारी खुशियां समाई हुई थी अब हम उन्हीं यादों को आंखों के रूप में सहज ना चाहते हैं और हमने उसका नेत्रदान का मन बनाया ताकि जिस किसी भी व्यक्ति को उन आंखों का सहारा मिलेगा वह हमारे परिवार के लिए स्मरणीय क्षण होगा रविवार को अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समाज जन के अलावा धार्मिक सामाजिक, राजनीतिक संगठनों, ने उन्हें श्रद्धांजलि दी एवं पिता के द्वारा लिऐ गए साहसिक फैसले का भी स्वागत किया


