मालवा लाइव।पेटलावद
पेटलावद। जीवन में गुणों का सम्मान व आदर करना चाहिए , रूप का नहीं। शपथ का निष्ठा पूर्वक पालन करना चाहिए। संकल्पों के प्रति निष्ठा या श्रद्धा का भाव होना चाहिए।
उक्त आशय के उदगार श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के 11वें अनुशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या शासन श्री साध्वी श्री मधुबाला जी ने श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा और तेरापंथ युवक परिषद के संयुक्त शपथ ग्रहण समारोह के दौरान श्रावक -श्राविकाओ के समक्ष व्यक्त किए।
आपने कहा कि शपथ ग्रहण करने वाले पदाधिकारियों में ग्रहण किए गए संकल्पों के प्रति श्रद्धा का भाव हो, मन में संकल्पों के प्रति समर्पण की भावना हो तथा जीवन के उतार-चढ़ाव या अनुकूलता - प्रतिकूलताओ में सम (सन्तुलित) रहने का प्रयास होना चाहिए।
हम सबका दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक होना चाहिए तथा सब के प्रति हमारे मन में सम्मान का भाव हो, दूसरों के गुणों के प्रति प्रमोद भावना होना चाहिए।
आपने टीम रूप में कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा की साथ में काम करने वालों के कार्य का मूल्यांकन हो तथा सत्कार्यो की सराहना होना चाहिए, साथ ही साथ हम जिस संघ में साधना कर रहे हैं उन संघपति गुरु परम पूज्य आचार्य महाश्रमण जी के प्रति गहरी निष्ठा का भाव बना रहना चाहिए।
आपने प्रेरणा के स्वर में कहा कि कार्यकर्ता आपस में मतभेद न रखें और पेटलावद नगर की प्रतिष्ठा के अनुरूप कार्य करते रहें, आपने इस अवसर पर राजा भोज और कालिदास की कथा के माध्यम से सरल भाषा में कार्यकर्ताओं को अपने जीवन में गुणों के विकास की प्रेरणा प्रदान की।
साध्वी श्री मंजुलयशाजी ने कहा की दो प्रकार के नेता होते हैं एक राजनीतिक नेता और धार्मिक नेता। दोनों के कार्यों में कुछ समानताएं होती है और उनके आचरणो में अंतर भी होता है, राजनीतिक नेता अपनी घोषणाओं पर कई बार अमल नहीं भी करते हैं जबकि धार्मिक नेता अपने वचनों का पालन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं, हमें अपने जीवन में धर्म नेताओं से प्रेरणा लेकर अपने वचनों के पालन के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए, कार्यकर्ता सपने देखें और दृढ़ संकल्प के साथ उसे पूरा करने का प्रयास करें, आपने टीम शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि टी शब्द से हमें टारगेट की प्रेरणा मिलती है कि जीवन में लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए कि हमें किस रूप में क्या काम करना है।
ई अर्थात एनर्जी हमारे जीवन में ऊर्जा का संचार बना रहे, और उत्साह पूर्वक हम अच्छे कार्य करते रहें ।
ए शब्द हमें एडजस्टमेंट की प्रेरणा देता है यानी कि हम सब के साथ सामंजस्य बिठाकर कार्य करते रहें, अकेले चलने की मनोवृत्ति से बचे और एम यानी मोटिवेशन
साथ में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते रहें। प्रोत्साहन के द्वारा सोई हुई शक्तियां जाग जाती है।
आपने उदाहरण द्वारा अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि छोटी उम्र में हाथी के बच्चों को सब शक्ल से बांध दिया जाता है तो उसके मन में यह धारणा बन जाती है कि मैं इस शक्ल को नहीं तोड़ सकता अब बड़ा होने पर जब उसकी शक्तियां बढ़ जाती है तब भी अपनी बढ़ी हुई शक्ति का अनुभव कराने वाले के अभाव में बहुत साधारण सी साकल से अपने धारणा के आधार पर बंधा रह जाता है।
मालवा ऐसी पावन भूमि है जहां भक्तांबर और कल्याण मंदिर जैसे पावन स्तोत्रों की रचना हुई है।संकल्प बल प्रबल हो तो कठिन से कठिन कार्य किया जा सकता है। आपने गीत के द्वारा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करने का प्रयास किया।
आज के शपथ ग्रहण समारोह में तेरापंथी सभा के निवर्तमान अध्यक्ष विनोद भंडारी ने तेरापंथी सभा के नवीन अध्यक्ष मनोज गादिया को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई और मनोज गादिया ने तेरापंथी सभा के नवमनोनीत पदाधिकारियों को शपथ दिलवाई।
तेरापंथी सभा के निवर्तमान अध्यक्ष विनोद भंडारी ने तेरापंथ युवक परिषद के नव मनोनीत अध्यक्ष पंकज मूणत को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
पंकज मूणत ने तेरापन्थ युवक परिषद के नवमनोनीत पदाधिकारियों के नाम की घोषणा की तथा पदाधिकारियों को शपथ दिलवाई।
कार्यक्रम में तेरापंथी सभा के निवर्तमान अध्यक्ष विनोद भंडारी, महिला मंडल की नवमनोनीत अध्यक्ष अनीता जीवनलाल मूणत, तेरापंथी सभा के नवमनोनीत अध्यक्ष मनोज गादिया ने अपनी भावनाएं व्यक्त की।
कार्यक्रम का संचालन राजेश वोरा ने किया, आभार ज्ञापन महेश भंडारी ने किया।
उपस्थित समाजजनों ने सभी नवमनोनीत पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए आगामी कार्यकाल की सफलता के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त की।

