☀ ~ आज का श्रीविद्या पंचांग~☀ ☀ 11 - Aug - 2022

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जय श्री कृष्ण👏🏻

संस्थापक -  प. पू. गुरूदेव आचार्यडाँ देवेन्द्र जी शास्त्री (धारियाखेडी)

मन्दसौर (म. प्र.)

09977943155



☀ ~ आज का श्रीविद्या  पंचांग~☀


☀ 11 - Aug - 2022

☀ Mandsaur, India


☀~ श्रीविद्या  पंचांग ~☀

    

🔅 तिथि  चतुर्दशी  10:39 AM

🔅 नक्षत्र :

               उत्तराषाढ़ा  06:53 AM

               श्रवण  06:53 AM

🔅 करण :

           वणिज  10:39 AM

           विष्टि  10:39 AM

🔅 पक्ष  शुक्ल  

🔅 योग  आयुष्मान  03:31 PM

🔅 वार  गुरूवार  


☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ    

🔅 सूर्योदय  06:02 AM  

🔅 चन्द्रोदय  06:53 PM  

🔅 चन्द्र राशि  मकर  

🔅 सूर्यास्त  07:06 PM  

🔅 चन्द्रास्त  +06:00 AM  

🔅 ऋतु  वर्षा  


☀ हिन्दू मास एवं वर्ष    

🔅 शक सम्वत  1944  शुभकृत

🔅 कलि सम्वत  5124  

🔅 दिन काल  01:03 PM  

       राक्षस संवत्सर

🔅 विक्रम सम्वत  2079  

🔅 मास अमांत  श्रावण  

🔅 मास पूर्णिमांत  श्रावण  


☀ शुभ और अशुभ समय    

☀ शुभ समय    

🔅 अभिजित  12:08:40 - 13:00:56

☀ अशुभ समय    

🔅 दुष्टमुहूर्त  10:24 AM - 11:16 AM

🔅 कंटक  03:37 PM - 04:29 PM

🔅 यमघण्ट  06:55 AM - 07:47 AM

🔅 राहु काल  02:12 PM - 03:50 PM

🔅 कुलिक  10:24 AM - 11:16 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  05:22 PM - 06:14 PM

🔅 यमगण्ड  06:02 AM - 07:40 AM

🔅 गुलिक काल  09:18 AM - 10:56 AM

☀ दिशा शूल    

🔅 दिशा शूल  दक्षिण  


☀ चन्द्रबल और ताराबल    

☀ ताराबल  

🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती  

☀ चन्द्रबल  

🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन  


*लक्ष्मी पूजन तिथि* 

स्कंद पुराण में लिखा है पौष मास की शुक्ल पक्ष की दसमी तिथि, चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की और सावन महिने की पूनम (श्रावणी पूनम- 11 अगस्त 2022 गुरुवार) ये दिन लक्ष्मी पूजा के खास उपाय  बताये गये हैं | इन दिनों में अगर कोई आर्थिक कष्ट से जूझ रहा है | पैसों की बहुत तंगी है घर में तो 12 मंत्र लक्ष्मी माता के बोलकर, शांत बैठकर मानसिक पूजा करें  और उनको नमन करें तो उसको भगवती लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, लाभ होता है, घर में लक्ष्मी स्थायी हो जाती है | उसके घर से आर्थिक समस्याएं धीरे धीरे किनारा करती हैं  | बारह मंत्र इसप्रकार हैं –

ॐ ऐश्‍वर्यै नम:

ॐ कमलायै नम:

ॐ लक्ष्मयै नम:

ॐ चलायै नम:

ॐ भुत्यै नम:

ॐ हरिप्रियायै नम:

ॐ पद्मायै नम:

ॐ पद्माल्यायै नम:

ॐ संपत्यै नम:

ॐ ऊच्चयै नम:

ॐ श्रीयै नम:

ॐ पद्मधारिन्यै नम:

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्ति प्रदायिनि | मंत्रपूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते ||

द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यय पठेत | स्थिरा लक्ष्मीर्भवेतस्य पुत्रदाराबिभिस: ||

उसके घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है | जो इन बारह नामों को इन दिनों में पठन करता है |

*रक्षाबंधनः संकल्पशक्ति का प्रतीक*

रक्षाबंधन के दिन बहन भैया के ललाट पर तिलक-अक्षत लगाकर संकल्प करती है कि 'मेरा भाई भगवत्प्रेमी बने। जैसे शिवजी त्रिलोचन हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, वैसे ही मेरे भाई में भी विवेक-वैराग्य बढ़े, मोक्ष का ज्ञान, मोक्षमय प्रेमस्वरूप ईश्वर का प्रकाश आये। मेरा भाई धीर-गम्भीर हो। मेरे भैया की सूझबूझ, यश, कीर्ति और ओज-तेज अक्षुण्ण रहे।' भाई सोचे कि 'हमारी बहन भी चरित्रप्रेमी, भगवत्प्रेमी बने।'

इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्ष भर मनुष्य रक्षित हो जाता है। (भविष्य पुराण)

रक्षाबंधन के पर्व पर बहन भाई को आयु, आरोग्य  पुष्टि की बृद्धि की भावना से राखी बाँधती है। अपना उद्देश्य ऊँचा बनाने का संकल्प लेकर ब्राह्मण लोग जनेऊ बदलते हैं।

समुद्र का तूफानी स्वभाव श्रावणी पूनम के बाद शांत होने लगता है। इससे जो समुद्री व्यापार करते हैं, वे नारियल फोड़ते हैं।


☀~ श्रीविद्या  पंचांग ~☀


कार्यालय

श्रीविद्यापचांग

सिद्धचक्र विहार 

मन्दसौर मध्यप्रदेश 

आप का दिन शुभ हो 

भारतमाता की जय

09977943155

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