संस्कृत भाषा संस्कृति की रक्षा और बढ़ावा देती है

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मालवा लाइव।पेटलावद 

आदिवासी क्षेत्रों में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्कृत भारती मालवा प्रान्त संस्था द्वारा झाबुआ जिले के बेकल्दा ग्राम में संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन किया गया । जोकि 1 अगस्त से 30 अगस्त तक चल रहा है ।

जहां शिविर में प्रतिदिन 100 से अधिक आदिवासी बच्चे संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त कर रहे है। गुरूवार को तहसील पत्रकार संघ कार्यालय पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए शिविर प्रशिक्षक मोहनलाल डामर ने बताया कि एक समय में संस्कृत को क्लिस्ट और विद्वानों की भाषा माना जाता था किंतु इसे जन जन की भाषा बनाने के लिए हमारे द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं ।और सभी को इस भाषा से जोडऩे के प्रयास किए जा रहे ।

संस्कृत वह भाषा है जोकि संस्कृति की रक्षा और संस्कारों को बढावा देती है 

संस्कृत  एक वैज्ञानिक और पूर्ण भाषा है ।जिसको वैज्ञानिकों ने भी माना है और आने वाले समय में संस्कृत का उपयोग कम्प्यूटर व अन्य वैज्ञानिकों द्वारा  किया जाएगा ।

संस्कृत भाषा में किसी प्रकार की गाली नहीं होती है यदि बच्चे इस भाषा को सीखेंगे तो संस्कारों का विकास होगा।

संस्कृत भाषा को  बढ़ावा देने के लिए संस्था द्वारा विभिन्न स्थानों पर शिविर व प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये है। 

सरकार ने भी संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए हमारे हर प्रयास में सहयोग किया है । 

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्री डामर ने बताया कि हम निःशुल्क संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हैं इसमें न किसी जाति धर्म का भेदभाव है यह भाषा हर कोई सीख सकता है 

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र व्यास ,मनोज जानी, संजय पी लोढा, वीरेन्द्र भट्ट , हरिश राठौड़ ,सुनिल खोडे, शानु ठाकुर,राहुल वैरागी आदि उपस्थित रहे

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