जय श्री कृष्ण👏🏻
संस्थापक - प. पू. गुरूदेव आचार्यडाँ देवेन्द्र जी शास्त्री (धारियाखेडी)
मन्दसौर (म. प्र.)
09977943155
☀ ~ आज का श्रीविद्या पंचांग~☀
☀ 10 - Sep - 2022
☀ Mandsaur, India
☀~ श्रीविद्या पंचांग ~☀
🔅 तिथि पूर्णिमा 03:30 PM
🔅 नक्षत्र शतभिषा 09:37 AM
🔅 करण :
बव 03:30 PM
बालव 03:30 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग धृति 02:54 PM
🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:14 AM
🔅 चन्द्रोदय 06:55 PM
🔅 चन्द्र राशि कुम्भ
🔅 सूर्यास्त 06:39 PM
🔅 चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 12:25 PM
राक्षस संवत्सर
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:01:50 - 12:51:30
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:14 AM - 07:03 AM
🔅 कंटक 12:01 PM - 12:51 PM
🔅 यमघण्ट 03:20 PM - 04:10 PM
🔅 राहु काल 09:20 AM - 10:53 AM
🔅 कुलिक 07:03 AM - 07:53 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:41 PM - 02:30 PM
🔅 यमगण्ड 01:59 PM - 03:32 PM
🔅 गुलिक काल 06:14 AM - 07:47 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ
🚩 *श्रीमद्भागवत भक्तिरस महोत्सव* 🚩
दिनाँक 18 से 24 दिसम्बर 2022
🚩 *वाराणसी पहुँचने हेतु उपलब्ध ट्रेन* 🚩
रतलाम से वाराणसी दिनाँक 16 दिसम्बर के टिकट करवाने है
1 . ट्रेन नम्बर 19489 - अहमदाबाद गोरखपुर एक्सप्रेस
इस ट्रेन में रतलाम , नागदा , उज्जैन, संत हिरदाराम नगर(बैरागढ़) से बैठ सकते है
2. ट्रेन नम्बर 20414 - महाकाल एक्सप्रेस
इस ट्रेन में इंदौर , उज्जैन ,संत हिरदाराम नगर(बैरागढ़) से टिकट करा सकते हैं
3. ट्रेन नम्बर13238 - कोटा पटना एक्सप्रेस
इस ट्रेन में कोटा से रिजर्वेशन करवा सकते हैं
4. ट्रेन नम्बर 11071 - कामायनी एक्सप्रेस
इस ट्रेन में भोपाल के यात्री रिजर्वेशन करा सकते हैं
🚩 *श्रीमद्भागवत कथा पुर्णाहुति के बाद वाराणसी से रिटर्न हेतु ट्रेन* 🚩
ट्रेन नम्बर 22970 - वाराणसी ओखा सुपर फास्ट दिनाँक 24 दिसंबर 2022
वाराणसी से ,कोटा , नागदा , रतलाम के लिए इसमें 24 दिसम्बर के टिकट करा सकते है
ट्रेन नम्बर 14490- गोरखपुर - अहमदाबाद एक्सप्रेस दिनाँक 25 दिसंबर 2022 को रात्रि 2:30 बजे
वाराणसी से बैरागढ़ , उज्जैन ,नागदा , रतलाम के लिए इसमें 25 दिसम्बर के टिकट करा सकते हैं
🚩 *स्थान-मुमुक्षु भवन, अस्सी घाट , वाराणसी* 🚩
पंजीयन राशि - 7100/-
1. पंजीयन होते ही रूम आवंटित कर दिया जाएगा
2. सभी डीलक्स रूम में प्रत्येक में 4 व्यक्ति ठहर सकेंगे
3. बड़े परिवार को एक ही डीलक्स हॉल चाहिए तो 10 व्यक्तियों की क्षमता के साथ रुक सकते हैं
4. एक रूम में केवल यदि 2 व्यक्ति ही रुकना चाहते हैं तो 15000/- रुपये प्रति व्यक्ति के अनुसार पंजीयन कराना होगा.
*श्राद्ध में पालने योग्य नियम*
10 सितम्बर 2022 शनिवार से महालय श्राद्ध आरम्भ ।
श्रद्धा और मंत्र के मेल से पितरों की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे 'श्राद्ध' कहते हैं।
हमारे जिन संबंधियों का देहावसान हो गया है, जिनको दूसरा शरीर नहीं मिला है वे पितृलोक में अथवा इधर-उधर विचरण करते हैं, उनके लिए पिण्डदान किया जाता है।
बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिण्डदान नहीं किया जाता।
विचारशील पुरुष को चाहिए कि जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही संयमी, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दे। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।
भोजन के लिए उपस्थित अन्न अत्यंत मधुर, भोजनकर्ता की इच्छा के अनुसार तथा अच्छी प्रकार सिद्ध किया हुआ होना चाहिए। पात्रों में भोजन रखकर श्राद्धकर्ता को अत्यंत सुंदर एवं मधुर वाणी से कहना चाहिए कि 'हे महानुभावो ! अब आप लोग अपनी इच्छा के अनुसार भोजन करें।'
श्रद्धायुक्त व्यक्तियों द्वारा नाम और गोत्र का उच्चारण करके दिया हुआ अन्न पितृगण को वे जैसे आहार के योग्य होते हैं वैसा ही होकर मिलता है। (विष्णु पुराणः 3.16,16)
श्राद्धकाल में शरीर, द्रव्य, स्त्री, भूमि, मन, मंत्र और ब्राह्मण-ये सात चीजें विशेष शुद्ध होनी चाहिए।
श्राद्ध में तीन बातों को ध्यान में रखना चाहिएः शुद्धि, अक्रोध और अत्वरा (जल्दबाजी नही करना)।
श्राद्ध में मंत्र का बड़ा महत्त्व है। श्राद्ध में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, लेकिन आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम अस्त-व्यस्त हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।
जिनकी देहावसना-तिथि का पता नहीं है, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए।
हिन्दुओं में जब पत्नी संसार से जाती है तो पति को हाथ जोड़कर कहती हैः 'मुझसे कुछ अपराध हो गया हो तो क्षमा करना और मेरी सदगति के लिए आप प्रार्थना करना।' अगर पति जाता है तो हाथ जोड़ते हुए पत्नी से कहता हैः 'जाने-अनजाने में तेरे साथ मैंने कभी कठोर व्यवहार किया हो तो तू मुझे क्षमा कर देना और मेरी सदगति के लिए प्रार्थना करना।'
हम एक दूसरे की सदगति के लिए जीते जी भी सोचते हैं, मरते समय भी सोचते हैं और मरने के बाद भी सोचते है
*श्राद्ध सम्बन्धी बातें*
श्राद्ध कर्म करते समय जो श्राद्ध का भोजन कराया जाता है, तो ११.३६ से १२.२४ तक उत्तम काल होता है l
गया, पुष्कर, प्रयाग और हरिद्वार में श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है l
गौशाला में, देवालय में और नदी तट पर श्राद्ध करना श्रेष्ठ माना गया है l
सोना, चांदी, तांबा और कांसे के बर्तन में अथवा पलाश के पत्तल में भोजन करना-कराना अति उत्तम माना गया है l लोहा, मिटटी आदि के बर्तन काम में नहीं लाने चाहिए l
श्राद्ध के समय अक्रोध रहना, जल्दबाजी न करना और बड़े लोगों को या बहुत लोगों को श्राद्ध में सम्मिलित नहीं करना चाहिए, नहीं तो इधर-उधर ध्यान बंट जायेगा, तो जिनके प्रति श्राद्ध सद्भावना और सत उद्देश्य से जो श्राद्ध करना चाहिए, वो फिर दिखावे के उद्देश्य में सामान्य कर्म हो जाता है l
सफ़ेद सुगन्धित पुष्प श्राद्ध कर्म में काम में लाने चाहिए l लाल, काले फूलों का त्याग करना चाहिए l अति मादक गंध वाले फूल अथवा सुगंध हीन फूल श्राद्ध कर्म में काम में नहीं लाये जाते हैं l
☀~ श्रीविद्या पंचांग ~☀
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श्रीविद्यापचांग
सिद्धचक्र विहार
मन्दसौर मध्यप्रदेश
आप का दिन शुभ हो
भारतमाता की जय
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