मेमू रेलगाडी में हो रही फजीहत-रेल्वे ने आम यात्रियों को छोडा भगवान भरोसे रात्रिकालीन मेमू के रैक को दाहोद उज्जैन चलाए तो मिलेगी राहत

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बामनिया-उत्सव राजेश सोनी

रेलखण्ड की जीवन रेखा साबित होने वाली प्रमुख रेलगाडी दाहोद रतलाम उज्जैन मेमू रेलगाडी में कोच कम दिए जाने से आम रेल यात्रियों को आ रही भारी परेशानी को रेल्वे द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है ।जनप्रतिनिधि ,समाचार पत्र एवं आम यात्रियों द्वारा रेल्वे को परेशानी दर्शाने के बावजूद रेल प्रशासन इस ज्वलंत समस्या को लेकर सजगता नहीं दिखा रहा है । चार कोच कम होने से वर्तमान में ही यात्रियों को बैठना तो ठीक खडे रहने की जगह बमुशिकल मिल पा रही है ,जबकि जल्द ही सोयाबीन फसल की कटाई का समय आ रहा है और उस समय इस बहुपयोगी रेलगाडी में अधिकतम यात्री दवाब के समय की स्थिति बनती है ।वर्तमान हालात में तो स्थिति ओर गंभीर बन सकती है । दाहोद से रतलाम चलने वाली 12 डिब्बों वाली रात्रिकालीन मेमू के रैक को रेल्वे सुबह नए रैक के स्थान पर चलाए तो यात्रियों को कुछ सुविधा मिल सकती है ।


रेल्वे की ये कैसी उदासीनता-


रतलाम दाहोद रेलखण्ड की एकमात्र बहुपयोगी सामान्य यात्री रेलगाडी दाहोद रतलाम उज्जैन मेमू को लेकर रेल प्रषासन लम्बे समय से उदासीन बना हुआ है । रेलखण्ड पर यात्रा करने वालेे व्यवसायी, अपडाउनर्स, विघार्थी, श्रमिक एवं आम यात्रियों के लिए मेमू रेलगाडी प्रमुख रूप से उपयोगी है । किन्तु रेल्वे ने इस महत्वपूर्ण रेलगाडी के चार कोच कम करके आमजन को परेशानी में डाल दिया है ।आठ डिब्बों की इस रेलगाडी में जगह मिलना तो दूर रहा ,यात्रियों को डिब्बे में प्रवेश के लिए भी परेशानी उठाना पडती है । दाहोद से रतलाम तक का सफर अधिकांश यात्रियों को खचाखच भरे डिब्बों में येनकेन खडे खडे ही करना पडता है । इस रेलगाडी का रैक बडौदा से दाहोद और उसके बाद दाहोद से रतलाम उज्जैन के लिए चलाया जाता है जिस कारण से सांयकालीन मेमू में दाहोद से ही जगह मिलना मुश्किल हो जाता है । सोयाबीन फसल कटाई के समय क्षेत्र के श्रमिक इसी रेलगाडी से बडी संख्या में मालवाचंल के विभिन्न स्थानों पर आवाजाही करते है ।वर्तमान में मेमू की हालत को देखते हुए सोयाबीन फसल कटाई के समय की संभावित स्थिति को रेल प्रशासन द्वारा गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ।


खाली चल रही गाडी में 12 कोच-


सबसे अधिकतम यात्री दवाब वाली दाहोद रतलाम उज्जैन मेमू को रेल प्रषासन द्वारा चार कोच कम करके मात्र 8 कोच के साथ चलाया जा रहा है । जबकि न्यूनतम यात्री दवाब वाली दाहोद रतलाम दाहोद रात्रिकालीन मेमू को 12 कोच के चलाया जा रहा है । रेल्वे चार कोच कम करने में रैक नहीं होने का हवाला देता आया है । रेल्वे यदि रात्रिकालीन मेमू के रैक को सुबह चलाए तो आम यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है ।


जतन से मिल रही निराशा-


मेमू के कोच कम होने के बाद आ रही परेशानी को लेकर अपडाउनर्स साथियों, समाचार पत्रों एवं जनप्रतिनिधियों आदि द्वारा रेल्वे को वस्तुस्थिति से अवगत कराने बहुतेरे प्रयास किए है किन्तु रेल प्रशासन मूकदर्शक बनकर यात्रियों की इस बडी परेशानी देख रहा है ।


इनका कहना है -


मेमू में कोच पूर्ववत होने को लेकर प्रयास जारी है । रात्रिकालीन मेमू के रैक को सुबह में शिफट किए जाने का सुझाव बेहतर है ,विभाग को अवगत करवाया जाएगा ।

-खेमराज मीणा , जनसम्पर्कअधि. रतलाम रेलमण्डल

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