गौरव व्यास। मालवा लाइव शाजापुर
शाजापुर। स्कंद पुराण में कथा है कि दक्ष प्रजापति ने आयोजित यज्ञ में महादेव को आमंत्रित नहीं करने से नाराज होकर यज्ञ में पहुंचीं माता सती ने भोलेनाथ का अपमान होते देख यज्ञकुंड में प्रवेश कर लिया था। बाद में पहुंचे वीरभद्र ने माता की देह कुंड से निकालकर भोलेनाथ को दी थी। देह को लेकर निकले क्रोधित महादेव के क्रोध को कम करने के लिए भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर के चक्र से टुकड़े कर दिए थे। ऐसे में देह के अंग जहां भी गिरे वहां शक्तिपीठ स्थापित हो गए। माता का दाहिना चरण यहां पर गिरा था। इस चरण का निशान अभी-भी यहां है जिसका पूजन किया जाता है।

