पट्टेदारी को जमीन की आवश्यकता नही तो पुनः घोषित की जाए शासकीय

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- शासकीय जमीन को दिखाने के लिए दी पुनः पट्टे पर, पर हो गया करोड़ो में सौदा

पेटलावद। टुडे रिपोर्टर

भूमाफिया जमीनों को हथियाने के कैसे कैसे पैतरे अपनाते हैं, यह जानकर शासन में बैठे नुमाइंदे भी आश्चर्य में पड़ जाते है।

पिछले कुछ दिनों से तेजी से प्रकाश में आया करडावद मार्ग का मामला इस दिनों नगर के साथ जिले भर के प्रशासनिक अमले में खासा चर्चा का विषय बना हुआ है।

यहां तो अति तब हो गई जब शासकीय भूमि को लीज के नाम पर सीधे विक्रय कर दी गई हो। शासन के आज से 30-40 साल पहले गुजर बसर के लिए पट्टे पर भूमि दी गई थी। लेकिन अब वे पट्टे धारी उसी शासकीय जमीन को करोड़ो में विक्रय कर रहे है भले ही कागजो में लीज शब्द डाला गया हो। वास्तव में दूसरे पेज पर विधिवत उसके बाद रजिस्ट्रेट करवाकर बिक्री भी हो गई है। तथाकथित भूमाफिया शासन को गुमराह कर रहे है।

ज्ञात हो कि सम्पूर्ण झाबुआ जिले के साथ विशेषकर पेटलावद में भू-माफियो की पो बारह हुई पडी है। नगर में सक्रिय भू-माफिया इस कदर जमीन बेचने-खरीदने के काम में लगे है कि, जिसकी कोई हद नही। 

इन भू-माफिया दलालों की नजर सबसे अधिक उन जमीनो पर है जो सरकारी भूमि से लगी हुई है या फिर पट्टे की है जिसकी सरकारी तंत्र की साठ-गांठ से निजी बना कर करोड़ो के व्यारे-न्यारे किये जा रहे है।

 नगर के बदनावर मार्ग पर शासन द्वारा भागीरथ पिता वरदा काग निवासी पेटलावद को 595/1/2 पर जीवन यापन करने हेतु कृषि भूमि पट्टे जो अहस्तांतरित कृषि पट्टा था। वर्तमान में भूमि पर कृषि नही की जा रही है और स्टेट हाइवे से लगी होने के कारण भूमि की लागत करोड़ो में है। इस भूमि को मनीष कुमार पिता मनोहर लाल भण्डारी निवासी पेटलावद व रवि पिता रमण लाल चौधरी निवासी रायपुरिया के साथ मिलकर इन्हे उक्त भूमि की गलत तरीके से व शासन को गुमराह कर गलत जानकारी पेश कर उक्त पट्टे की अहस्तांतरित भूमि को परिवर्तित कर लीज रजिस्ट्री 12 अप्रैल 2022 को करवाई ली गई।

जहां पर अब इन भूमाफिया द्वारा कृषि ना करके पेट्रोल पंप डालने की योजना बना कर इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी है।

 पेटलावद-करडावद की सीमा पर स्थित है और नगरीय सीमा मे होने से यह भूमि बेशकीमती करोड़ों रुपए की है और इस पर विगत कई वर्षों से कृषि नही की जा रही है। उक्त भूमि को कृषि पट्टे की अहस्तानतरित भूमि को डायवर्टेड याने परिवर्तित करवाया गया, जबकि नियमानुसार केवल कृषि के लिए दी गई पट्टे की भूमि को कृषि कार्य में ही उपयोग की जा सकती हैं और भूमि जो की अहस्तांतरि हैं उसे हस्तांतरित करने व लीज कराने के लिए कलेक्टर की अनुमति ली जाती हैं जो नहीं ली गई हैं।

अब भूमि की लीज करवाने वालो के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की तैयारी की जा रही है।

क्या कहता है नियम-

अहस्तांतरित कृषि कार्य हेतु दिए गए पट्टे को डायवर्टेड करवा कर बिना सक्षम आधिकारी (कलेक्टर) की अनुमति लिए इसकी 20 वर्ष की लीज रजिस्ट्री करवाई गई है। जो कि, मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7) का पूर्ण उलंघन है जो अपराध की श्रेणी में आता है।

शासकीय घोषित किया जाए- उक्त भूमि को शासन हित में पट्टेदार को बेदखल शासकीय घोषित किया जा सकता और सम्बन्धित सभी मिली भगत करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियो के साथ पट्टेदार भागीरथ पिता वरदा काग निवासी पेटलावद, मनीष पिता मनोहर लाल भण्डारी निवासी पेटलावद, रविंद्र पिता भेरूलाल चौधरी निवासी रायपुरिया सहित गवाहदारो के खिलाफ़ आपराधिक प्रकरण दर्ज होना तय है।

एसडीएम को है प्रतिवेदन का अधिकार-

इस प्रकार के मामले ओर शासकीय जमीनों की निगरानी की जवाबदारी एसडीएम ओर तहसीलदार की होती है। एसडीएम को इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर उक्त भूमि को शासकीय घोषित करने के कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजने का अधिकार है। इसी प्रकार के एक मामले में एसडीएम शासकीय पट्टे की भूमि जिसका उपयोग पट्टेदार नही कर रहा तो उसे शासकीय मद में परिवर्तित करने के ऐतिहासिक निर्णय लेकर प्रतिवेदन भेजा जा चुका है।

जनसुनवाई में पहुँचेगा आवेदन-

मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में पूरे मामले की जानकारी लिखित जनसुनवाई में नगर के सामाजिक कार्यकर्ता देंगे और उक्त भूमि को पुनः शासकीय मद में शामिल करने की मांग करते हुए जनहित में भूमि का उपयोग करने की भी मांग की जाएगी।

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