10 हजार की जगह पकड़ाई थी 500 कि खेल सामग्री, अभी चल रही है एफआईआर में शामिल फर्मो की दुकान

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- फर्म का नाम बदला, स्थान वही, जीएसटी ओर आयकर विभाग को कर रहे गुमराह

- सामाजिक कार्यकर्ता ने न्यायालय से किया निवेदन अग्रिम जमानत हो खारिज, जीएसटी ओर आयकर को भी कार्यवाही के लिए लिखा पत्र

पेटलावद। टुडे रिपोर्टर

नौनिहालों की खेल प्रतिभा निखारने के लिए शासन द्वारा प्रत्येक विद्यालय में खेल खिलौने की सामग्री के लिए 5 से 10 हजार की राशि आवंटित की गई थी। जिसमे सप्लायर फर्म ने जमकर भष्ट्राचार करते हुए महज 500 रुपए के खिलौने स्कूलों को सप्लाय कर दिए थे।

हालांकि मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने सप्लायर फर्मो के प्रोप्राइटर पर पुलिस प्रकरण दर्ज करवाया था और उन्हें ब्लेक लिस्टेड किया था। 

इसके बावजूद चालक फर्मो के प्रोप्राइटरो ने दो काम किए। एक तो उसी नाम से दूसरी बैंक में खाता खुलवा लिया तो दूसरा यह कि उसी स्थान पर जहां फर्म को ब्लैक लिस्टेड किया था दूसरी जीएसटी फर्म बना ली। मामले की जानकारी तक जब हमारी टीम पहुँची तो आश्चर्य जनक यह बात निकलकर आई कि एक ही स्थान पर अब इस मालिको दो से तीन नई फर्मो का पंजीयन करवा लिया ताकि फिर से इस तरह की कोई कार्यवाही प्रशासन की हो तो दूसरी फर्म से फर्जी काम जारी रहे।

हमारे सूत्र इस बात के पक्के प्रमाण देते है कि पेटलावद की प्रमुख फर्म जिसके खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज किया गया था आज भी यह फर्म अन्य फर्म के नाम से फर्जी बिल दे रही है जिसमे विभिन्न ग्राम पंचायतें ओर स्कूल शामिल है। जिसका भी प्रमाण के साथ हम सिलसिलेवार खुलासा करेंगे।

 झाबुआ जिले के सप्लायरओ ने मिलकर बच्चों के साथ दगा किया। इस मामले में तत्कालीन प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। पुलिस प्रकरण दर्ज होने के बाद फर्जी सप्लायर जो पिछले लंबे समय से इस प्रकार के कार्य में लिप्त हैं ने अपनी अग्रिम जमानत तो करवा ली। लेकिन आज भी मामला न्यायालय में लंबित है।आश्चर्य तो प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर तब होता है जब वह फर्म जहां पर इस प्रकार का व्यवसाय जीएसटी नंबर के साथ किया जा रहा था। उन फर्मों पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही कठोर रूप से नहीं होने के कारण लगभग डेढ़ साल बीत गया और उसी स्थान पर फर्जी ब्लैक लिस्टेड एफआईआर वाली फर्म अपना व्यवसाय बदस्तूर चला रही है।

आलम यह है कि ब्लैक लिस्टेड फर्म और उसके प्रोपराइटर आज भी बैंकों में उसी नाम से खाता संचालित कर रहे हैं तो बिल भी शासकीय विभागों जैसे ग्राम पंचायत, स्कूलों आदि में दिए जा रहे हैं।

 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पेटलावद की फर्म पर विभाग ने तालाबंदी की कोई कार्यवाही नहीं की। जिसके कारण आज भी कई लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इन लिस्टेड फ़र्मो पर जीएसटी विभाग ने भी किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही प्रचलित नहीं की। जिससे प्रशासन, जीएसटी व आयकर विभाग तीनों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

मामले में आरोपी फर्म के प्रोपराइटर अग्रिम जमानत पर आज भी इस प्रकार के फर्जी व्यवसाय को संचालित कर रहे हैं। फिलहाल मामला न्यायालय में है। झाबुआ जिले के सामाजिक कार्यकर्ता उक्त मामले को लेकर पुनः सक्रिय हो गए हैं। माननीय न्यायालय से अग्रिम जमानत के बाद भी फर्जी रूप से उसी फर्म के माध्यम से व्यवसाय करना, को लेकर माननीय न्यायालय को सामाजिक कार्यकर्ता अवगत कराते हुए नौनिहालों के साथ गलत रूप से उनका हक छीनने वाले फर्मो के प्रोपराइटर की अग्रिम जमानत को खारिज करने के लिए निवेदन आवेदन प्रस्तुत करेंगे।

 मिली जानकारी के अनुसार इन फर्मो के मालिकों ने जीएसटी व आयकर को बचाने के उद्देश्य से एक से अधिक फर्मो का भी पंजीयन करवा रखा है। इसके साथ ही वह फर्म जो ब्लैक लिस्टेड की गई थी जिसमें बच्चों के अधिकार का पैसा आया था उक्त खाते के अलावा उसी नाम से अन्य बैंकों में खाता खुलवा कर लेनदेन अभी भी किया जा रहा है। मामले को लेकर जीएसटी व आयकर विभाग को संज्ञान दिलाने के लिए एक पत्र इन विभागों को भी सामाजिक संगठनों ने लिखा है।

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