एक ही जमीन को बेच दी कई लोगों को, वर्षों से परेशान हो रहे खरीददार

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- मामला राजस्व और पुलिस के पाले में

पेटलावद। टुडे रिपोर्टर

रोटी, कपड़ा और मकान यह तीनों आम हो या खास सभी के लिए जरूरी है। नौकरी, व्यवसाय, खेती-बाड़ी कर सभी लोग जो कमाते हैं उसमें कुछ राशि बचाकर अपने व परिवार के लिए घर के लिए जमीन खरीदने की सोच जरूर रखते हैं। सभी लोगों का यह सपना होता है कि उनका एक अच्छा मकान शहर में भी हो। लेकिन पेटलावद में आम लोगों का यह सपना अब पूरा होना मुश्किल हो गया है, क्योंकि दलालों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि ऐसा लग रहा है जमीन का संपूर्ण स्वामित्व दलालों के हाथों में ही है और यह दलाल भी बडे बडे स्वप्र बाग दिखाकर फर्जी दस्तावेजों से जमीनों के भी सौदे करवा रहे हैं।

कई मामले ऐसे भी इस खेल में आ रहे हैं कि दलाल अंधेरे में रखकर एक ही भूमि की एक से अधिक लोगों को रजिस्ट्री करवा रहे हैं। ऐसे कई दलाल हैं जो राजनीतिक रसूख रखते हैं जो अपने को तीस मार खा समझ कर प्रशासन और पुलिस को अपनी जेब में रखते हैं। लेकिन जब कानून का डंडा चलता हैं तो दोषियों को सजा मिलनी तय होती हैं।

ग्राहक खोजने से लेकर जमीन दिखाने व रजिस्ट्री विभाग में पहुंचकर जमीन रजिस्ट्री कराने तक का कार्य दलाल कर रहे हैं। जमीन खरीद-बिक्री के व्यवसाय में दलालों के बीच में पडऩे से जमीन का भाव सातवें आसमान पर है। जिस जमीन की कीमत दो-तीन लाख प्रति बीघा होनी चाहिए, उसका दाम सीधे पांच गुना यानी दस लाख रुपये बीघा बताया जा रहा है। ऐसे में एक साधारण व्यक्ति के लिए जमीन खरीदना कैसे संभव होगा। यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्लाट के भावों की स्थिति यह हैं कि जहां २० लाख में मकान बनकर सामान्य परिवार का तैयार हो जाता हैं वहां उसे प्लाट भी नही मिल पा रहा हैं।

पेटलावद नगर की ही बात की जाए तो मुख्य जगहों को छोड़ जो अभी कृषि क्षेत्र हैं वहां की जमीन भी दलालों ने ऐसी निर्धारित कर दी है कि सुनकर ही लोग आश्चर्य जता रहे हैं। जिस जमीन पर धान की फसल अभी लगी है उस जमीन की कीमत आठ से दस लाख रुपये प्रति बीघा बताई जा रही है। ग्राहकों को तरह-तरह की बातों को बता दलाल ऐसा भ्रमित कर रहे हैं कि लोग भी उनके चंगुल में फंस रहे हैं। इसमें कई मामले तो ऐसे सामने आए हैं कि एक ही जमीन को दलाल दो-तीन लोगों को बिक्री करा दी गई। इसका नतीजा है कि थाने व कचहरी में वादों की संख्या भी बढ़ रही है।

वास्तविक जानकारी नहीं देते दलाल-

जमीन खरीद-बिक्री में सरकार की नई नीति लागू होने के बाद दलाल और झूठ का सहारा लेने लगे हैं। जमीन में यदि किसी तरह का विवाद है तो उसका जिक्र तक दलाल नहीं कर रहे। दलालों का मुख्य उद्देश्य है कि किसी तरह की जमीन बिक जाए और मोटी रकम उनकी जेब में आ जाए। चाहे ग्राहक को जमीन लेने के बाद कोई फजीहत हो, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।

इस मामले में प्रशासन भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं कर सका है जबकि प्रशासनिक कार्यालयों में ही जमीन विवाद के मामले पहुंच रहे हैं। फिर भी प्रशासन कोई पहल नहीं कर पा रहा। जब कोई मारपीट या विवाद होता है तो प्रशासनिक पदाधिकारी कार्रवाई करना शुरू करते हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि दलालों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब आम लोगों के लिए शहर में रहने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

घाटियां काटकर प्लाटिंग कर दी-

नगर में कृषि भूमि को प्लाटिंग कर बेचने का खेल तो जोरों पर है। साथ ही घाटियां खोदकर भी प्लाटिंग काटने का कार्य किया जा रहा है। थांदला रोड, हनुमानगढ़ रोड, रायपुरिया रोड पर ऐसी कई घाटियां हैं जिन्हें खोदकर अब वहां प्लाटिंग कर दी गई है। जिम्मेदार जानकर भी अंजान बने हुए हैं। सारा खेल राजस्व विभाग की नजरों में है, लेकिन इस ओर कोई कारवाई नहीं की जा रही है।

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