जितेंद्र नागर।टुडे रिपोर्टर
मेघनगर। झाबुआ में भारी वाहनों के नगर में प्रवेश से लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने भारी वाहनों के नगर में निश्चित समय अवधि में प्रवेश पर रोक लगा दी जो कि नागरिकों को सुरक्षा को लेकर उचित भी है।
फिर भी एक प्रश्न है उठना लाजमी है कि क्या केवल झाबुआ के नागरिकों को ही भारी वाहनों से दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना है क्या यह नियम मेघनगर में लागू नहीं होना चाहिए ? भारी वाहन तो ठीक मेघनगर में खाद से भरे ओवरलोड वाहनों से जब खाद की बोरियां बाहर झांकतीं है तो ऐसा लगता है मानो प्रशासन ने खाद परिवहन कर्ता को अभय वरदान दिया है और यातायात के नियमों से इन्हें मुक्त कर रखा है।
इन भारी ओवरलोड वाहनों के कारण अनेक बार स्थानीय साईं चौराहा पर जाम की स्थिति बनती है जो पूरे नगर को दिखाई देती है। किंतु प्रशासन की आंख पर कोई तो ऐसी पट्टी बंधी है जिससे उन्हें ना तो नगर का जाम नजर आता है और ना ही सुरक्षा को ताक पर रखकर गाड़ियों के ऊपर लदी हुई खाद की बोरियां।
मंदिर और मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर पर तो ध्वनि प्रदूषण के नियम लागू होते हैं किंतु इन वाहनों में प्रेशर हॉर्न होने के बाद भी इन्हें परमिट किस प्रकार मिल जाता है यह समझने के लिए दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जागरूक नागरिकों एवं समाचार पत्रों द्वारा लगातार मामला संज्ञान में लाने के बाद भी खाद से भरे ओवरलोड वाहनों पर कार्यवाही ना करना प्रशासन के उदासीन रवैयै को दर्शाता है। वैसे चौराहों पर आज भी चर्चा यही है की 'खासदार' पर कार्रवाई होगी कब ?

