स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में पेटलावद न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला: चेक बाउंस मामले में आरोपी को 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 4.27 लाख का प्रतिकर

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​पेटलावद। टुडे रिपोर्टर

चेक अनादरण (चेक बाउंस) से जुड़े एक अहम मामले में पेटलावद न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सोहनलाल भगोरा ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत फैसला सुनाते हुए आरोपी को सजा सुनाई है।

​मामले में आरोपी विष्णु पिता अंबराम मेड़ा, निवासी रूपारेल है।

जिसे न्यायालय ने 1 वर्ष का सश्रम कारावास ओर

​प्रतिकर मुआवजा राशि कुल ₹4,27,619/- जो एक माह के भीतर बैंक को अदा करनी होगी तथा निर्धारित समय सीमा में प्रतिकर राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को 2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

आरोपी द्वारा बैंक ऋण चुकाने के लिए जारी किया गया 2,40,237/- का चेक अपर्याप्त राशि के कारण अनादरित (बाउंस) हो गया था।

​कानूनी कार्रवाई एवं पैरवी

​बैंक की ओर से अधिवक्ता निलेशचंद्र सिंह कुशवाह ने की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष सभी दस्तावेजी साक्ष्य प्रमाणित करवाए तथा बैंक शाखा प्रबंधक अपूर्व श्रीवास्तव के बयान दर्ज कराए।

​अभिभाषक द्वारा प्रस्तुत तर्कों तथा न्यायालय के न्यायदृष्टांतों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और उपर्युक्त सजा का आदेश पारित किया।


​बैंक प्रबंधन की अपील-

​"बैंक के शाखा प्रबंधक अपूर्व श्रीवास्तव ने सभी बैंक उपभोक्ताओं और उधारकर्ताओं से अपील की है कि वे अपने ऋण खातों का नियमित संचालन करें और समय पर भुगतान कर ऐसी कानूनी और असहज स्थितियों से बचें।"

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