अल्पवर्षा एवं गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिले में जल स्रोतों के उपयोग एवं निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित किया पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोतों से कृषि, व्यावसायिक एवं निजी प्रयोजनों हेतु जल निकासी प्रतिबंधित आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध होगी वैधानिक कार्रवाई, प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू

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झाबुआ।

 जिले में इस वर्ष औसत से कम वर्षा होने एवं भूजल स्तर में लगातार गिरावट को दृष्टिगत रखते हुए आगामी समय में संभावित पेयजल संकट की रोकथाम तथा आमजन को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, झाबुआ द्वारा जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में जल स्रोतों के उपयोग एवं निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। इसके अंतर्गत जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए जल स्रोतों के संरक्षण एवं पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रतिबंध लागू किए गए हैं।


कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, झाबुआ से प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार जिले में इस वर्ष औसत से कम वर्षा होने के कारण भूजल स्तर में अभी से गिरावट देखी जा रही है। अल्पवर्षा के कारण ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित पारंपरिक जल स्रोतों एवं जलाशयों का जलस्तर अत्यंत चिंताजनक स्थिति में है। ऐसी परिस्थितियों में आगामी समय में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल की समस्या उत्पन्न होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण एवं पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।


प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, झाबुआ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 तथा मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 एवं संशोधन अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिले के संपूर्ण नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित कर समस्त जल स्रोतों को अधिग्रहित करने संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।


*जल स्रोतों से कृषि, व्यावसायिक एवं निजी प्रयोजनों के लिए जल उपयोग प्रतिबंधित*

जारी आदेश के अनुसार जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित समस्त पारंपरिक जल स्रोतों एवं जलाशयों, जिनमें कुएं, बावड़ियां, तालाब, नदियां, नाले, बांध एवं शासकीय नलकूप शामिल हैं, से कृषि, व्यावसायिक एवं निजी प्रयोजनों के लिए मोटर पंपों तथा टैंकरों के माध्यम से पानी का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। इसके अतिरिक्त जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में निजी नलकूप खनन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।


इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों का संरक्षण करना तथा आगामी समय में संभावित पेयजल संकट की स्थिति में आमजन को पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।


*शासकीय जल स्रोतों पर अवैध मोटर पंपों को हटाने के निर्देश*

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि शासकीय जल स्रोतों पर अवैध रूप से स्थापित मोटर पंपों एवं जल निकासी के लिए उपयोग की जा रही अनधिकृत व्यवस्थाओं का सर्वेक्षण किया जाए। सर्वेक्षण के दौरान ऐसी व्यवस्थाएं पाए जाने पर उन्हें नियमानुसार हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


साथ ही नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को शासकीय जल स्रोतों की नियमित निगरानी करने तथा प्रतिबंधों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


*पेयजल की उपलब्धता को दी जाएगी सर्वोच्च प्राथमिकता*

जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संभावित पेयजल संकट की स्थिति में आमजन को पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। शासकीय जल स्रोतों का उपयोग केवल आवश्यक एवं अनुमत प्रयोजनों के लिए ही सुनिश्चित किया जाएगा।


इसके साथ ही नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे आमजन को जल संरक्षण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग तथा पारंपरिक पेयजल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक करें। नागरिकों को उपलब्ध जल संसाधनों का आवश्यकतानुसार उपयोग करने तथा जल की अनावश्यक बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित किया जाए।


*प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर होगी वैधानिक कार्रवाई*

आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधात्मक निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध संबंधित विभाग एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रचलित नियमों के अंतर्गत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


जनसाधारण के हित एवं संभावित पेयजल संकट की गंभीरता को देखते हुए आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना आवश्यक होने के कारण भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163(2) के अंतर्गत एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 तथा संशोधन अधिनियम, 2002 में निहित प्रावधानों के अनुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।


*नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश*

प्रतिबंधात्मक आदेश की जानकारी जिले के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। इसके अंतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में यथासंभव ध्वनि विस्तारक यंत्रों तथा डोंडी पिटवाकर आमजन को आदेश की जानकारी दी जाएगी।


इसके अतिरिक्त आदेश की प्रतियां जिला कार्यालय, समस्त नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों, जनपद पंचायतों, तहसील कार्यालयों एवं पुलिस थानों के सूचना पटल पर चस्पा की जाएंगी। साथ ही प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर भी आदेश प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को प्रतिबंधों एवं निर्देशों की जानकारी प्राप्त हो सके।


*आदेश के उल्लंघन की सूचना दे सकेंगे नागरिक, पहचान रखी जाएगी गोपनीय*

जारी आदेश के अनुसार यदि किसी नागरिक के संज्ञान में प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन की जानकारी आती है, तो वह तत्काल संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), तहसीलदार अथवा थाना प्रभारी को इसकी सूचना दे सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान एवं संबंधित जानकारी गोपनीय रखी जाएगी।


जिला प्रशासन द्वारा आमजन से जल संरक्षण में सहयोग करने, उपलब्ध जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा प्रतिबंधात्मक आदेश का पालन करने की अपील की गई है।


उक्त प्रतिबंधात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।


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