गुलाब की खेती कर कृषि में आत्मनिर्भर बन रहे किसान

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रायपुरिया। राजेश राठौड़

अब किसान खेती किसानी में आत्म निर्भरता की ओर बढ़ कर खेती को लाभ का धंधा बना रहे है।

रायपुरिया से जामली मार्ग पर सहसा एक खेत पर नजर पड़ी। जिसमे गुलाब के पौधे नजर आए। जिस पर गुलाब खिले हुए थे जो आते जाते राहगीरों को आकर्षित कर रहे थे। वहा जाकर खेत के मालिक छापड़ापाड़ा निवासी लालू पाटीदार से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि हमने एक बीघा के खेत मे गुलाब लगाए है। ये डेविड गुलाब है। इनकी कलम हम महाराष्ट्र राज्य से करीब 1000 पौधे लाये थे। जिसका खर्च 15000 रु आया। अभी गर्मी में इनमे गुलाब लगने लगे है। इसमें पूरे वर्ष फूल लगते है। पहले इस क्षेत्र में  फूलो की खेती नही होती थी। जब में बदनावर गया था तो वहां फूलो खेती देख मुझे भी इसकी खेती करने की सोची। हमारे क्षेत्र में  माही डेम की नहर भी आ गई है।   तो उससे फूलो की खेती का मन बनाया। इसमें मेहनत बहुत है कांटेदार पौधे होने से सावधानी भी रखनी पड़ती है। इसकी तुडाई के लिए 5 से 6 मजदूर भी लगते है। अभी 50 किलो गुलाब  प्रतिदिन निकल रहे है। जिसका भाव 20 से 30 रुपए किलो मिल रहा है।

 रतलाम के अलावा आसपास फूलो की मंडी न होने के कारण परेशानी आती है। हम लोग खेती से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश जरूर कर रहे है। लेकिन कभी मौसम तो कभी भाव न मिलना परेशानी में डाल देता है। लालू भाई का कहना है कि आसपास अगर इत्र बनाने की इकाई लग जाये तो फूलो का रकबा ओर भी बढ़ेगा और कृषको का फूलो की खेती की तरफ रुझान बढ़ेगा। जिससे वह अपनी रूढ़िवादी कृषि छोड़ कृषि को लाभ का धंधा बना सकते है।

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