चातुर्मास में जीन वाणी और पानी का महत्व सबसे ज्यादा

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मालवा लाइव।पेटलावद 


पेटलावद। चातुर्मास में जीन वाणी और पानी का महत्व सबसे ज्यादा होता है पानी ना बरसे तो हाहाकार मच जाता है और जम के बरसता है तो शहर का सारा कचरा बहा ले जाता है, वैसे ही जिनवाणी चार महा बरसे और जो व्यक्ति उसे आत्मसात करें उसके जीवन में भरा क्रोध मान माया लोभ रुपी कचरा बाहर निकल जाता है, पेटलावद की माटी गौरवशाली है जब-जब हम ने चातुर्मास किए हैं तब तब इतिहास बनाया है, इस चातुर्मास को भी आप सबको मिलकर ऐतिहासिक बनाना है चार माह विशिष्ट तप आराधना करना है तपस्या की शुरुआत में जरूर कठिनाइयां आती है पर जैसे जैसे  मन इसमें रमता जाता है तपस्या आसान होती जाती है ,ज्ञान से हमें सही समझ मिलती है दर्शन से हममें धर्म में श्रद्धा मजबूत होती है चारित्र से संयम मजबूत होता है पर तपस्या से कर्म क्षय होते हैं और हमारी आत्मा सिद्ध बन जाती है, उक्त बातें वर्ष 2022 के चातुर्मास की प्रथम पाक्षीक पर्व व चातुर्मास के प्रारंभ होने पर साध्वी श्री पुण्य शीला जी महाराज साहब ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

 आपने आगे कहां जीवों की रक्षा के लिए, जीयो और जीने दो व अहिंसा के सदेंश को सही रूप में पालन करने के लिए भगवान की आज्ञा अनुसार हम साधु साध्वी को एक स्थान पर स्थिर होकर चतुर्मास करना होता है  इस समयावधि में  हमधर्म आराधना करते भी है और करवाते भी हैं आप सभी लोगों को इस में जुड़ना है।

 पेटलावद गौरव महक श्री जी ने कहा है गुरु मां ने पेटलावद में जब जब भी चातुर्मास किए हैं तब तब   इतिहास रचा है पहली बार आपको अनुपम शीला जी के रूप में पहली शिष्या मिली दूसरी बार में भी एक संयमी आत्मा ( सुव्रता जी)मिली इस चातुर्मास में भी ऐसा ही इतिहास बनाना है। चातुर्मास के प्रथम दिन पर श्री संघ में तपस्या की झड़ी लग गई छोटी सी बालिका विदुषी नरेंद्र भंडारी ने  छु:उपवास चंदनमल  चाणोदीया ने पांच महेंद्र मेहता ( नाना भाई) ने दो  के साहेंट से अधिक लोगों ने उपवास पचा से ज्यादा एक ऐकासने के प्रत्याख्यान भी लिए ,दिन में दो से तीन बजे तक नवकार मंत्र का जाप भी हुए जाप में भाग लेने वाले को कमला देवी मेहता कि और से प्रभावना बांटी गई।।कई श्रावक श्राविका ओं ने पौषध व्रत भी अंगीकार किये ।  प्रतिदिन तेला बेला उपवास आयबींल की श्रृंखला चल रही है। आज की सभा में बामनिया रायपुरिया जामली हमीरगढ़ रूपगढ़  करवड बरबेट आदि गांवों से भी धर्मालु गण पधारे।

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