झोलाछाप डॉक्टरों के हौंसले बुलंद मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड,कब होगी काठोर कार्यवाही साहब......

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तन्मय चतुर्वेदी @मालवा LiVE 

झाबुआ जिले के पेटलावद में गांव-गांव में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानों में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं। खास बात यह है कि अधिकतर झोलाछाप डॉक्टरों की उम्र 30 से 40 साल के बीच है। मरीज की हालत बिगड़ती है तो उससे आनन फानन में सरकारी अस्पताल भेज दिया जाता है। या फिर हालात खराब होने पर हाथ खडे कर दिए जाते है। जबकि यह लापरवाही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की जानकारी में भी है। और पहले भी कईयों पर कार्यवाही हुई पर कुछ दिनो मे ही लोगो कि जीदंगी के साथ खिवाड करने वाले ये मौत के सौदागर सक्रिय हो जाते है ना ही इने प्रशासन कि कार्यवाही का कोई डर है ना ही किसी कि जान जाने का ।

दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाएं नहीं हैं। इसका फायदा सीधे तौर पर झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। गांव में सरकारी इलाज की सुविधा नहीं है। बीमार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज कराना पड़ता है।


बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण भी करते हैं डॉक्टर

झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है। बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। दुकानों के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई सालों से अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय कर रहे लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही तो कि गई। लेकिन बस नाम कि  इन दिनों मौसमी बीमारियों का कहर है। झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें मरीजों से भरी पड़ी हैं। गर्मी व तपन बढ़ने के कारण इन दिनो उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा पनप रही हैं। झोलाछाप इन मर्जों का इलाज ग्लूकोज की बोतलें लगाने से शुरू करते हैं। एक बोतल चढ़ाने के लिए इनकी फीस 100 से 200 रुपए तक होती है।


विभाग कार्यवाही तो करता है लेकिन.... 

झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से अब तक कई लोगों की असमय जान चली गई लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने स्थाई तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं की। पहले कार्यवाही तो कि गई कुछ झोलाछाप पर कार्यवाही कर गिरफ्तार भी किया गया दुकानें सील भी की गई थीं। लेकिन कुछ दिनो मे ये झोलाछाप फिर से सक्रिय हो गए और अपना व्यापार भरपूर तरीके से करने लग गए । ग्रामीण क्षेत्र में एक बार भी प्रशासन की कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन दूर से ही इन्हें देख रहा है।



केस बिगड़ने पर अस्पताल रैफर कर देते हैं मरीज

बीते कुछ वर्षों से फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कोई मात्र फर्स्ट एड के डिग्रीधारी हैं तो कोई अपने आप को बवासीर या दंत चिकित्सक बता रहा है लेकिन इनके निजी क्लीनिकों में लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज धड़ल्ले से किया जा रहा है। कुछ डॉक्टरों ने तो अपनी क्लिनिक में ही ब्लड जांच, यूरीन जांच इत्यादि की सुविधा भी कर रखी है।

कब होगी काठोर कार्यवाही या फिर मौत के सौदागर ऐसे ही करेगे जान से खिलवाड कब जागेगा प्रशासन ?

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