बामनिया-उत्सव सोनी
भगवान के चरणों में जितना समय बीत जाए उतना अच्छा है। इस संसार में एक-एक पल बहुत कीमती है। जो बीत गया सो बीत गया। इसलिए जीवन को व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए। भगवान द्वारा प्रदान किए गए जीवन को भगवान के साथ और भगवान के सत्संग में ही व्यतीत करना चाहिए।
उक्त उदगार क्षेत्र के युवा पं. नितिन त्रिपाठी ने स्थानीय श्रीराम मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के दौरान उपस्थिति श्रद्वालुओं के समक्ष व्यक्त किए ।
उन्होंने कहा कि भागवत प्रश्न से प्रारंभ होती है और पहला ही प्रश्न है कि कलयुग के प्राणी का कल्याण कैसे होगा। इसमें सतयुग, त्रेता और द्वापर युग की चर्चा ही नहीं की गई है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि बार-बार यही चर्चा क्यों की जाती है, अन्य किसी की क्यों नहीं। इसके कई कारण हैं जैसे अल्प आयु, भाग्यहीन और रोगी।
इसलिए इस संसार में जो भगवान का भजन न कर सके, वह सबसे बड़ा भाग्यहीन है। भगवान इस धरती पर बार-बार इसलिए आते हैं ताकि हम कलयुग में उनकी कथाओं में आनंद ले सकें और कथाओं के माध्यम से अपना चित्त शुद्ध कर सकें। व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो।
श्रीराम मंदिर परिसर में चल रही श्रीमदभागवत कथा में बडी संख्या में महिला एवं पुरूप श्रद्वालुओं द्वारा कथा रसपान किया जा रहा है । युवा पं. नितिन त्रिपाठी द्वारा कथा के दौरान संगीतमय भजनों की सुन्दर प्रस्तुतियां दी जा रही है ।ज्ञातव्य है कि इनके पिता स्व. मोहनलाल त्रिपाठी क्षेत्र के प्रसिद्व व्याकरणाचार्य रहे है ।


