*जनजाति विकास मंच पेटलावद ने आयोजित किया मातृशक्ति सम्मेलन* *रानी दुर्गावती का जीवन चरित्र हमें हमें पढ़ना चाहिए, ताकि मातृशक्ति के अंदर साहस उत्पन्न हो सकें:-* *राज्यमंत्री सोनम निनामा*

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मालवा लाइव।पेटलावद 

पेटलावद।स्थानीय बामनिया रोड सुंदर गार्डन में जनजाति विकास मंच पेटलावद खण्ड द्वारा खण्ड स्तरीय मातृशक्ति सम्मेलन आयोजित किया।

जिसमें पेटलावद खण्ड की 100 से अधिक माता-बहनें उपस्थित हुई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में म.प्र. बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त श्रीमती सोनम निनामा उपस्थित हुई। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि आजादी से लेकर समाज सुधार तक महिलाओं का योगदान समाज में अहम है, मातृशक्ति चाहे तो सब कुछ कर सकती है, एक जनजातीय महिला राष्ट्रपति पद तक पहुंच सकती है, तो हम भी कम नहीं है, हम यदि एक बार संकल्प लेकर चले तो समाज में नशा मुक्ति, व्यसन मुक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं महिला जनजागरण में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं,नारी अबला नहीं सबला है।

तत्पश्चात श्रीमती सुनीता दीदी सेवा भारती प्रांत किशोर विकास प्रमुख द्वारा उद्बोधन दिया गया, उन्होंने कहा कि झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम आदि जनजातीय क्षेत्र की छात्राएं उज्जैन एवं इंदौर तथा अन्य कई जगहों पर सेवा भारती द्वारा संचालित छात्रावासों में अध्ययनरत है और हमारा लक्ष्य है, कि निर्धन छात्राएं हमारी छात्रावासों में पढ़ने के बाद एक अच्छे मुकाम पर जाएं हमारा सपना है, कि हमारी छात्राओं में से पढ़कर बहनें शासकीय सेवक के रूप में कार्य करें हम इस दिशा में प्रयत्नशील हैं।

स्वयं सहायता समूह की दीदी श्रीमती जैमा बारिया द्वारा अपने क्षेत्र की महिलाओं की समस्याएं एवं कमजोरियां क्या-क्या है, इस पर उन्होंने प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि मैं एक अशिक्षित महिला होकर भी आजीविका मिशन जैसी संस्था में एक सम्मानजनक पद पर कार्यरत हूं, तो आप भी प्रयास करें तो खुद आगे बढ़ सकते हैं। महिलाओं को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए महिला को रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगनाओं के जीवन चरित्र को पढ़कर और सुनकर बहुत कुछ करने का साहस उत्पन्न होता है।

जनजातीय कार्य रतलाम विभाग के कार्य प्रमुख श्री राजेश डावर ने अपने उद्बोधन में बताया कि अपने समाज में परंपरा, संस्कृति, रीति-रिवाज, पहनावा आदि समाज की नई पीढ़ी भूलती जा रही है, जो हमारे समाज के पहचान के लिए घातक है। हमारा समाज जिस नाते जाना जाता है, वह है- हमारी संस्कृति, रिती-रिवाज, परंपरा, बोली इनको हमें जीवित रखने के लिए महिलाओं को जागृत होकर घर परिवार में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आजकल थोड़ा बहुत बच्चा पढ़ लिख जाता है, तो अपनी बोली पहनावा और परंपराओं को हीन भावना से देखना प्रारंभ कर देता है, लेकिन वह समाज के हित में नहीं है। इसलिए जागरूक होकर समाज में महिलाओं की भी भूमिका होना चाहिए, ताकि समाज को सही दिशा मिल सके।

कार्यक्रम में विशेष रूप से सेवा भारती के प्रांत संगठन मंत्री रूपसिंह नागर, पार्षद श्रीमती ममता गुजराती, जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश सह संयोजक खेमसिंह जमरा, सह जिला संयोजक संजय मखोड़, युवा कार्यकर्ता गौरसिंह कटारा, अमरसिंह सोलंकी, कोमल निनामा, जनपद सदस्य सोहन डामर, प्रकाश पारगी, राजेश मैडा, आदि मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन खण्ड संयोजक सुरसिंह मीणा ने किया।

आभार पेटलावद नगर संयोजक कांतिलाल डामर ने माना।

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