जय श्री कृष्ण👏🏻
संस्थापक - प. पू. गुरूदेव आचार्यडाँ देवेन्द्र जी शास्त्री (धारियाखेडी)
मन्दसौर (म. प्र.)
09977943155
☀ ~ आज का श्रीविद्या पंचांग~☀
☀ 11 - Oct - 2022
☀ Mandsaur, India
☀~ श्रीविद्या पंचांग ~☀
🔅 तिथि द्वितीया +01:31 AM
🔅 नक्षत्र अश्विनी 04:17 PM
🔅 करण :
तैतिल 01:31 PM
गर 01:31 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग हर्शण 03:15 PM
🔅 वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:25 AM
🔅 चन्द्रोदय 07:11 PM
🔅 चन्द्र राशि मेष
🔅 सूर्यास्त 06:07 PM
🔅 चन्द्रास्त 07:33 AM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:42 AM
राक्षस संवत्सर
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:53:01 - 12:39:50
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:45 AM - 09:32 AM
🔅 कंटक 07:12 AM - 07:58 AM
🔅 यमघण्ट 10:19 AM - 11:06 AM
🔅 राहु काल 03:12 PM - 04:39 PM
🔅 कुलिक 01:26 PM - 02:13 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 08:45 AM - 09:32 AM
🔅 यमगण्ड 09:20 AM - 10:48 AM
🔅 गुलिक काल 12:16 PM - 01:44 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ
🚩 *श्रीमद्भागवत भक्तिरस महोत्सव* 🚩
दिनाँक 18 से 24 दिसम्बर 2022
🚩 *वाराणसी पहुँचने हेतु उपलब्ध ट्रेन* 🚩
रतलाम से वाराणसी दिनाँक 16 दिसम्बर के टिकट करवाने है
1 . ट्रेन नम्बर 19489 - अहमदाबाद गोरखपुर एक्सप्रेस
इस ट्रेन में रतलाम , नागदा , उज्जैन, संत हिरदाराम नगर(बैरागढ़) से बैठ सकते है
2. ट्रेन नम्बर 20414 - महाकाल एक्सप्रेस
इस ट्रेन में इंदौर , उज्जैन ,संत हिरदाराम नगर(बैरागढ़) से टिकट करा सकते हैं
3. ट्रेन नम्बर13238 - कोटा पटना एक्सप्रेस
इस ट्रेन में कोटा से रिजर्वेशन करवा सकते हैं
4. ट्रेन नम्बर 11071 - कामायनी एक्सप्रेस
इस ट्रेन में भोपाल के यात्री रिजर्वेशन करा सकते हैं
🚩 *श्रीमद्भागवत कथा पुर्णाहुति के बाद वाराणसी से रिटर्न हेतु ट्रेन* 🚩
ट्रेन नम्बर 22970 - वाराणसी ओखा सुपर फास्ट दिनाँक 24 दिसंबर 2022
वाराणसी से ,कोटा , नागदा , रतलाम के लिए इसमें 24 दिसम्बर के टिकट करा सकते है
ट्रेन नम्बर 14490- गोरखपुर - अहमदाबाद एक्सप्रेस दिनाँक 25 दिसंबर 2022 को रात्रि 2:30 बजे
वाराणसी से बैरागढ़ , उज्जैन ,नागदा , रतलाम के लिए इसमें 25 दिसम्बर के टिकट करा सकते हैं
🚩 *स्थान-मुमुक्षु भवन, अस्सी घाट , वाराणसी* 🚩
पंजीयन राशि - 7100/-
1. पंजीयन होते ही रूम आवंटित कर दिया जाएगा
2. सभी डीलक्स रूम में प्रत्येक में 4 व्यक्ति ठहर सकेंगे
3. बड़े परिवार को एक ही डीलक्स हॉल चाहिए तो 10 व्यक्तियों की क्षमता के साथ रुक सकते हैं
4. एक रूम में केवल यदि 2 व्यक्ति ही रुकना चाहते हैं तो 15000/- रुपये प्रति व्यक्ति के अनुसार पंजीयन कराना होगा.
*कार्तिक में दीपदान*
10 अक्टूबर से 08 नवम्बर तक कार्तिक मास है ।
गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अभी अश्विन मास है ।
महापुण्यदायक तथा मोक्षदायक कार्तिक के मुख्य नियमों में सबसे प्रमुख नियम है दीपदान। दीपदान का अर्थ होता है आस्था के साथ दीपक प्रज्वलित करना। कार्तिक में प्रत्येक दिन दीपदान जरूर करना चाहिए।
पुराणों में वर्णन मिलता है।
“हरिजागरणं प्रातःस्नानं तुलसिसेवनम् । उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके।।“ (पद्मपुराण, उत्तरखण्ड, अध्याय 115)
“स्नानं च दीपदानं च तुलसीवनपालनम् । भूमिशय्या ब्रह्मचर्य्यं तथा द्विदलवर्जनम् ।।
विष्णुसंकीर्तनं सत्यं पुराणश्रवणं तथा । कार्तिके मासि कुर्वंति जीवन्मुक्तास्त एव हि ।।” (स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्ड, कार्तिकमासमाहात्म्यम, अध्याय 03)
पद्मपुराण उत्तरखंड, अध्याय 121 में कार्तिक में दीपदान की तुलना अश्वमेघ यज्ञ से की है :
घृतेन दीपको यस्य तिलतैलेन वा पुनः। ज्वलते यस्य सेनानीरश्वमेधेन तस्य किम्।
कार्तिक में घी अथवा तिल के तेल से जिसका दीपक जलता रहता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ से क्या लेना है।
अग्निपुराण के 200 वे अध्याय के अनुसार
दीपदानात्परं नास्ति न भूतं न भविष्यति
दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न होगा ही
स्कंदपुराण, वैष्णवखण्ड के अनुसार
सूर्यग्रहे कुरुक्षेत्रे नर्मदायां शशिग्रहे ।। तुलादानस्य यत्पुण्यं तदत्र दीपदानतः ।।
कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय और नर्मदा में चन्द्रग्रहण के समय अपने वजन के बराबर स्वर्ण के तुलादान करने का जो पुण्य है वह केवल दीपदान से मिल जाता है।
कार्तिक में दीपदान का एक मुख्य उद्देश्य पितरों का मार्ग प्रशस्त करना भी है।
"तुला संस्थे सहस्त्राशौ प्रदोषे भूतदर्शयोः
उल्का हस्ता नराः कुर्युः पितृणाम् मार्ग दर्शनम्।।"
पितरों के निमित्त दीपदान जरूर करें।
पद्मपुराण, उत्तरखंड, अध्याय 123 में महादेव कार्तिक में दीपदान का माहात्म्य सुनाते हुए अपने पुत्र कार्तिकेय से कहते हैं ।
शृणु दीपस्य माहात्म्यं कार्तिके शिखिवाहन। पितरश्चैव वांच्छंति सदा पितृगणैर्वृताः।।
भविष्यति कुलेऽस्माकं पितृभक्तः सुपुत्रकः। कार्तिके दीपदानेन यस्तोषयति केशवम्।।
“मनुष्य के पितर अन्य पितृगणों के साथ सदा इस बात की अभिलाषा करते हैं कि क्या हमारे कुल में भी कोई ऐसा उत्तम पितृभक्त पुत्र उत्पन्न होगा, जो कार्तिक में दीपदान करके श्रीकेशव को संतुष्ट कर सके। ”
☀~ श्रीविद्या पंचांग ~☀
कार्यालय
श्रीविद्यापचांग
सिद्धचक्र विहार
मन्दसौर मध्यप्रदेश
आप का दिन शुभ हो
भारतमाता की जय
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