ग्राम उगली में कृषक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम संपन्न: KVK वैज्ञानिकों ने दिए सोयाबीन की उन्नत खेती के गुरु

0



बंटी व्यास। शाजापुर 


शाजापुर। आगामी खरीफ सीजन को ध्‍यान में रखते हुए आज दिनांक 04 जून 2026  ग्राम उगली, जिला’- शाजापुर में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शाजापुर एवं कृषि विभाग शाजापुर द्वारा एक दिवसीय 'खरीफ फसलों की उन्नत तैयारी एवं प्रबंधन' पर कृषक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम किसान संघ के जिलाध्यक्ष श्री सवाई सिंह सिसोदिया, के मुख्‍य आतिथ्‍य एवं पूर्व प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.जी.आर.अम्बावतिया के विशिष्‍ट आतिथ्‍य में किया गया। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता केन्‍द्र प्रमुख, डॉ.एस.एस.धाकड़ ने की। कार्यक्रम में केन्‍द्र के वैज्ञानिक डॉ. मुकेश सिंह एवं डॉ डी.के.तिवारी व  श्री देवेन्‍द्र परमार वरिष्‍ठ कृषि विकास अधिकारी, श्री चंदरसिंह सिसोदयिा जिलामंत्री किसान संघ, शाजापुर, श्री राजेन्‍द्र मेवाड़ा, किसान संघ तहसली अध्‍यक्ष, शाजापुर के साथ प्रगतिशील किसान-श्री खामसिंह, श्री नरेन्‍द्र पाटीदार, श्री कमल पाटीदार, श्री सुरेश पाटीदार,श्री अक्‍शराव ठोगरे एवं 50 किसान भाई उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने उपस्थित किसानों को कम लागत में सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सलाह दी।


किसान संघ के जिलाध्यक्ष श्री सवाई सिंह सिसोदिया जी ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों का खेत पर प्रयोग करने को कहा जिससे कि कृषि उत्पादन बढ़ सके एवं कृषि  वैज्ञानिकों  द्वारा बताई गई उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।


वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. एस. धाकड़  द्वारा  आधुनिक कृषि तकनीक, सोयाबीन की फसल में जल निकास प्रबंधन एवं भू-जल संवर्धन, संरक्षित खेती, ,उन्नत कृषि यंत्रों, अवशेष प्रबंधन की जानकारी प्रदान की साथ ही किसानों को सलाह दी कि मॉनसून के आगमन से पहले किसानों को अपने खेतों की तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए केवल प्रमाणित व उन्नत किस्मों के बीजों का ही चयन करें और बिना मिट्टी परीक्षण के खेतों में अंधाधुंध खाद का उपयोग न करें साथ ही जल प्रबंधन और बुवाई की आधुनिक विधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे पारंपरिक विधि के बजाय 'रेज्ड बेड' (Raised Bed) या 'ब्रॉड बेड फरो' (BBF) पद्धति से बुवाई करें, जिससे अत्यधिक बारिश की स्थिति में जलभराव से फसल को नुकसान न हो और सूखा पड़ने पर भी नमी बनी रहे। 

 इस दौरान डॉ. जी.आर. अम्बावतिया (पूर्व प्रधान वैज्ञानिक/प्रमुख) ने उपस्थित सभी किसानों को सलाह दी कि उद्यानिकी एवं औषधीय फसलों की उन्नत कृषि तकनीक किसान भाईयों तक पहुंचाये जिससे किसान भाईयों की आय में वृद्धि हो सकें । साथ ही डॉ. मुकेश सिंह (वैज्ञानिक) द्वारा खरीफ सीजन के दौरान होने वाले कीट एवं व्याधि प्रबंधन की अग्रिम तैयारियों के बारे में भी बताया। साथ ही एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) तकनीकों, जैसे कि प्रकाश प्रपंच (Light Traps) और फेरोमोन ट्रैप के उपयोग पर जोर दिया ताकि रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता और खर्च को कम किया जा सके। इस दौरान कार्यक्रम में डॉ. डी.के. तिवारी (वैज्ञानिक) ने किसानो को खरीफ फसलो की उन्नत किस्म,एकीकृत उर्वरक प्रबंधन,खरपतवार प्रबंधन, के साथ जैविक खेती के विभिन्न विषयों की तकनीकि जानकारी दी। साथ ही कहा कि जब तक क्षेत्र में अच्छी बारिश (लगभग 3 से 4 इंच) न हो जाए और मिट्टी में गहराई तक पर्याप्त नमी न आ जाए, तब तक सोयाबीन की बुवाई में जल्दबाजी बिल्कुल न करने की सलाह दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम उगली से  प्रगतिशील किसान भाईयों ने वैज्ञानिकों से अपनी कृषि संबंधी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।

إرسال تعليق

0تعليقات
إرسال تعليق (0)