आचार्य श्री तुलसी साहस के पुतले थे, उनका बाहरी और भीतरी व्यक्तित्व बहुत निखरा हुआ था।

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मालवा लाइव ।पेटलावद


पेटलावद।उक्त आशय के उद्गार श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के 11वें अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या शासनश्री साध्वीश्री मधुबालाजी ने तेरापंथ धर्मसंघ के 9वे अनुशास्ता आचार्य श्री तुलसी के 26 वें महाप्रयाण दिवस (पुण्यतिथि) पर आयोजित विसर्जन दिवस कार्यक्रम में श्रावक- श्राविकाओं के समक्ष व्यक्त किए।


आपने कहा कि आचार्य तुलसी  बचपन से कड़े अनुशासन के धनी थे। 16 वर्ष की अवस्था में शिक्षक बनकर बड़े-बड़े संतो को अध्ययन करवाते थे और 22 वर्ष की युवावस्था में उनके गुरु परम पूज्य कालुगणी ने उन्हें तेरापंथ धर्मसंघ का नोवा आचार्य बनाकर उन पर कितना बड़ा विश्वास किया।


उनके अवदानों की लंबी श्रृंखला है। उन्होंने नया मोड़ आंदोलन का प्रवर्तन कर महिलाओं का उद्धार किया और आगम संपादन का विलक्षण कार्य किया।


अपने जीवन में अपने उत्तराधिकारी के रूप में आचार्य महाप्रज्ञ और साध्वीप्रमुखाश्री कनक प्रभाजी जैसे व्यक्तित्व का निर्माण किया।


इस अवसर पर साध्वी श्री विज्ञानश्रीजी ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी एक ऐसे विरल व्यक्तित्व थे जो जनता के जीवन की खोट (बुराई) मांगते थे। वे अपने जीवन में आने वाली प्रतिकूलताओं से कभी नहीं घबराए।

साध्वी श्री मंजुलयशाजी ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में अपने आचार्य पद का भी स्वेच्छा से विसर्जन कर महान कार्य किया किया।

साध्वी श्री सौभाग्य श्री जी ने संयोजन के दौरान आचार्यश्री के जीवन की विभिन्न विशेषताओं का उल्लेख किया।


आज के कार्यक्रम का मंगलाचरण तेरापंथी सभा के सदस्यों द्वारा किया गया, कार्यक्रम में साध्वी श्री प्रदीप प्रभाजी, तेरापंथी सभा के अध्यक्ष मनोज गादिया, तेरापंथी महासभा के आंचलिक प्रभारी दिलीप भंडारी, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पंकज मूणत, तेरापंथ युवक परिषद, महिला मंडल, कन्या मंडल व प्रीति पटवा, अरुण श्रीमाल द्वारा भी अपनी प्रस्तुति दी गयी।


उक्त अवसर पर कन्यामंडल ने अणुव्रत एक्सप्रेस नामक रोचक कार्यक्रम के माध्यम से आचार्य तुलसी द्वारा प्रदत्त विभिन्न  अवदानों का सरस शैली में वर्णन किया, आज के इस कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों से समाज जन भी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का संचालन साध्वी सौभाग्य श्री जी व आभार मनोहरलाल कोटड़िया ने माना।

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