मालवा लाइव।थांदला
थांदला। थांदला विराजित संत मण्डल पूज्य श्री चन्द्रेशमुनिजी एवं पूज्य श्री सुयशमुनिजी तथा महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा 4 के पावन सानिध्य में मालव केसरी पूज्य श्री सौभाग्यमलजी म.सा. की 38वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित गुनानुवाद सभा में पूज्य श्री चन्द्रेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि अल्प आयु में दीक्षित होकर सकल संघ में जैन धर्म की जागृति लाने का श्रेय गुरुदेव को जाता है तभी वे महाराष्ट्र विभूषण व मालव केसरी अलंकार से विभूषित होकर पूरे भारत में लोकप्रिय बने। उन्होनें कहा कि पूज्य श्री पूर्व कृत पुण्य से संयम में प्रविष्ट हुए व महज चार माह में प्रतिक्रमण कंठस्थ कर आगम वक्ता बन गए। उनके द्वारा रचित महापुरुषों के चारित्र सर्वाधिक लोकप्रिय है। उन्होनें सामाजिक एकता व व्यर्थ परम्पराओं व कुरीतियों पर कड़ा प्रहार कर लोकोपकार किया है। इस अवसर पर पूज्य श्री सुयशमुनिजी ने उनके बाल जीवन से लेकर दादा गुरुदेव पूज्य श्री सूर्यमुनिजी के सानिध्य आदि के स्मरण सुनाते हुए उनके जिन शासन पर किये गए उपकारों को याद किया। इस अवसर पर सभा का संचालन करते हुए संघ सचिव प्रदीप गादिया ने श्रीसंघ कि ओर से संघ पर किये उनके उपकारों को याद कर उन्हें नमन करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।
गुरुदेव की पुण्यतिथि पर 300 से अधिक एकासन
मालव केसरी के गुण कीर्तन के साथ ही संघ में नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप का आयोजन किया गया जिसकी प्रभावना समरथमल शाहजी परिवार द्वारा वितरित की गई। जानकारी देते हुए संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि श्रीसंघ द्वारा आयोजित सामूहिक एकासन तप में 300 से ज्यादा तपस्वियों ने तप कर अपनी आस्था प्रकट की। एकासन तप के लाभार्थी स्व.शांताबेन तलेरा स्मृति में राकेश-प्रफुल्ल तलेरा परिवार ने स्थानीय महावीर भवन पर सभी तप आराधकों के तप की व्यवस्था की है।
प्रांजल लोढ़ा पिंकी रुनवाल के 10 उपवास - 50 से ज्यादा तपस्वियों ने लिए अन्य प्रत्याख्यान
धर्म सभा में श्रीमती दीपा गौरव शाहजी ने 11 उपवास, श्रीमती पिंकी इंदर रुनवाल 10 उपवास, युवा प्रांजल लोढ़ा 10 उपवास, कु. सलोनी शाहजी 7 उपवास के साथ 30 पंचरंगी तप आराधकों ने तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किये।



